त्रिगुण माया जीव को मुक्त नहीं होने देतीपवित्र गीता जी के अ. 7 श्लोक 1 व 2 में ब्रह्म कह रहा है कि अर्जुन! अब तुझे वह ज्ञान सुनाऊँगा जिसके जानने के बाद और कुछ जानना बाकी नहीं रह जाता।