अगर इस जन्म में भी मोक्ष नहीं हुआ, तो असंख्य जन्मों तक ठौर नहीं।- काकभुशुण्डि जी की कथा। - ज्ञान गंगा पढ़ लेने वाली आत्माएं, सीधे सतलोक आश्रम आकर रुकेगी।- समझा है तो सिर धर पांव, बहुर नहीं रे ऐसा दाव।#संतरामपालजी_के_उद्देश्य